اج سک متراں
Punjabi
अज सिक्क मित्रां दी वढेरी ए
कियूँ दिलड़ी उदास घनेरी ए
लूँ लूँ विच शौक़ चंगेरी ए
अज नैनाँ ने लाइयाँ कियूँ झड़ियाँ
अज सिक्क मित्रां दी वढेरी ए
इस सूरत नूँ मैं जान आखाँ
जाणाँ कि जान-ए-जहाँ आखाँ
सच्च आखाँ ते रब्ब दी मैं शान आखाँ
जिस शान तूँ शानाँ सब बणियाँ
अज सिक्क मित्रां दी वढेरी ए
कियूँ दिलड़ी उदास घनेरी ए
मुख चन्द बदर शाशाणी ए
मत्थे चमके लाट नूरानी ए
काली ज़ुल्फ़ ते अख मस्तानी ए
मख़मूर अखीं हन मध भरियाँ
अज सिक्क मित्रां दी वढेरी ए
कियूँ दिलड़ी उदास घनेरी ए
लूँ लूँ विच शौक़ चंगेरी ए
अज नैनाँ ने लाइयाँ कियूँ झड़ियाँ
अज सिक्क मित्रां दी वढेरी ए
सुब्हानल्लाहि मा अजमलक
मा अह्सनक मा अकमलक
कित्थे मेहर अली कित्थे तेरी सना
गुस्ताख़ अखीं कित्थे जा अड़ियाँ
अज सिक्क मित्रां दी वढेरी ए
कियूँ दिलड़ी उदास घनेरी ए
लूँ लूँ विच शौक़ चंगेरी ए
अज नैनाँ ने लाइयाँ कियूँ झड़ियाँ
उन ज़ुल्फ़ों से बादल शरमाए
उस कमली पे दुनिया मिट जाए
वो आँख अगर उठ जाए जिधर
फिर उसको रहे न किसी की ख़बर
अज सिक्क मित्रां दी वढेरी ए
कियूँ दिलड़ी उदास घनेरी ए
लूँ लूँ विच शौक़ चंगेरी ए
अज नैनाँ ने लाइयाँ कियूँ झड़ियाँ